122. कबर में आये रफीक आका

 

 

कितना बुलन्द मर्तबा पाये रफीक आका!

इरफान आगही को पाये रफीक आका!!

 

जो बात हक्क है उस पे रहे कारबन्द आप!

पैगामे मारीफत भी सुनाये रफीक आका!!

 

दुनिया मजारे पाक पे हैरान होगयी!

जल्वा अहमदी भी दिखाये रफीक आका!!

 

तू और मैं की बातों में उल्झा था ये जहाँ!

अन्त अना का फर्क मिटाये रफीक आका!!

 

मुर्शद का मेरे ये भी करम कोई देख ले!

ना चीज़ को भी अपना बनाये रफीक आका!!

 

जाहिर की आँख और है बातिन की आँख और!

गँजे खफी का राज बताये रफीक आका!!

 

दावर सकून मिल गया मुझको मजार में!

बन कर फरिशता कबर में आये रफीक आका!!

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