120. रहबर को तो अपना बना ले

 

 

अहद अहमद के पर्दे को उठा ले कामयाबी है

किसी रहबर को तो अपना बना ले कामयाबी है

 

तू ग़फ़लत छोड़ दे और छोड़ दे दुनिया की उल्फ़त भी

इसी हस्ती में तो मैराज पा ले कामयाबी है

 

ग़ोरी कर के शैतान ना झुका आदम के सजदे को

किसी कामिल के आगे सर झुका ले कामयाबी है

 

लहद में जा के सो कर ये बता क्या क्या कमाएगा

कमाना जो भी है यहाँ पर कमा ले कामयाबी है

 

क्या है बे इंतिहा सजदे मगर शैतान क्या पाया

रियाकारी से अपने को बचा ले कामयाबी है

 

तमन्ना हूर ओ जन्नत की रही दिल में तो क्या हासिल

यहीं पर पारसा दिल को बना ले कामयाबी है

 

पकड़ कर दामन-ए-दावर कमा ले हश्र का तोशा

इन्हीं से नेकियाँ सारी कमा ले कामयाबी है

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