120. दो शमशीर

 

 

ये दिल में घर है बनाया पीर!

रखा है दोनों में दो शमशीर!!

 

अपना मुर्शद बनाया दिल में शजर है एक नादर!

नाम है उस का बाला जहाँ में रफीक है कादर!

वही है तेरे नगर का पीर!!

 

झाड़के अन्दर बात है न्यारी सुनाऊँ तुझको मैं!

समझ नहीं सो लोग रहे भाई समझते इसके गुन्!

मिलेगी उस में तुझे जागीर!!

 

सात हैं डालियाँ छेः हैं पते दो हैं उस में फूल!

पेड़ के अन्दर फल है उस का खयाल का बिन मोल!

अगर तू देख ले दिल को चीर!!

 

पेड़ है उसका अर्शे बरी पर पत्ते सब बड़के!

झाड वहाँ पर छोटासा है उलटे डालियाँ उसके!

यहाँ तू देखले तुझको चीर!!

 

पाँच है रंगाँ पच्चीस ढंगाँ फूल में है एक  संग!

संग के ऊपर नूरे मोहम्मद देखा अजीब एक ढंग!

अगर तू देखे तो फूल को चीर!!

 

सात जमीं में सात समा में कहाँ नहीं वो झाड!

खोके खुदी देख ले मन में अर्श बरीं पर झाड!

अगर तू देख ले मन को चीर!!

 

फल में उसके हजार खाने बींज हैं उस में करोड!

बींज के अन्दर रफीक है मेरा दावर उसे न छोड़!

मिलेगी उसमें तुझे जागीर!!

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