119. रम्ज-ए-इरफ़ान है

 

 

हमेशा झूमते जाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर

ख़ुदा को पास में पाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर

 

क़दम बोसी का मतलब है क़दम को चूम लेने का

क़दम के राज़ को पाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर

 

कहा क़दमों के नीचे माँ के जन्नत को रखा हूँ मैं

तो ये मतलब समझ जाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर

 

ज़मीन ओ आसमान सूरज सितारे चाँद कुल मंढा

क़दम क्या रम्ज़ बतलाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर

 

शराब-ए-मारिफ़त कहते हैं जिसको रम्ज़-ए-इरफ़ान है

नहीं धोखा कभी खाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर

 

सताते हैं तुम्हारे दिल के अंदर सैकड़ों क़तरे

सभी क़तरों को सुलझाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर

 

क़दम दावर जैसे कहदे तसव्वुर में समालना

कि तुम दुनिया को बतलाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर

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