हमेशा झूमते जाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर
ख़ुदा को पास में पाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर
क़दम बोसी का मतलब है क़दम को चूम लेने का
क़दम के राज़ को पाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर
कहा क़दमों के नीचे माँ के जन्नत को रखा हूँ मैं
तो ये मतलब समझ जाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर
ज़मीन ओ आसमान सूरज सितारे चाँद कुल मंढा
क़दम क्या रम्ज़ बतलाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर
शराब-ए-मारिफ़त कहते हैं जिसको रम्ज़-ए-इरफ़ान है
नहीं धोखा कभी खाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर
सताते हैं तुम्हारे दिल के अंदर सैकड़ों क़तरे
सभी क़तरों को सुलझाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर
क़दम दावर जैसे कहदे तसव्वुर में समालना
कि तुम दुनिया को बतलाओ शराब-ए-मारिफ़त पी कर