118. अजल क्या मिटाएगी

 

 

बेशक मेरे वजूद को मिट्टी न खाएगी

दिल को मेरे यकीन है वो छू न पाएगी

 

मुझ में खुदा रसूल ये दोनों का नूर है

जिस में ये दो का नूर है उसको बचाएगी

 

जिस ने लहद में नूर-ए-मुहम्मद का ले गया

उस की लहद में रोशनी खुद चल के आएगी

 

मेरे रसूल को तो अजल पूछ आई थी

मुझको भी मौत आएगी तो पूछ आएगी

 

अल्लाह के जितने दोस्त हैं, हैं सब के सब बक़ा

कुदरत बचाए जिसको अजल क्या मिटाएगी

 

जिस ने रसूल पाक के कलमा को पढ़ लिया

दोज़ख की आग उस को जलाने न पाएगी

 

देखा जो रब को दुनिया में आखिर भी दीद है

दावर तुझे ईमान की ताकत बचाएगी

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