जाम पर जाम यूँ हम ने पीने लगे!
आसियों के मुकद्दर बदलने लगे!!
मिल गई उन की नजरों से नज़रें यहाँ!
ला मकाँ से मकाँ हम तो जाने लगे!!
उन की सीरत है कुरआन नहीं शक जरा!
उनकी सूरत से इमाँ चमकने लगे!!
उन से तफसीर जब भी हुई है बयाँ!
मुर्दा दिल् जिन्दा होकर मचलने लगे!!
आगये मेरे घर उनके नाजुक कदम!
फिर मुकद्दर हमारे बदलने लगे!!
क्या बयाँ होसके हमसे शाने रफीक!
उन की खुशबू से ये दिल महकने लगे!!
एक दिन आईने से मुखातब थे हम!
हम थे गायब नज़र वो तो आने लगे!!
क्या बताऊँ रफीकी का हुस्न वो जमाल!
वो हमारे में हम उन में रहने लगे!!
रूख से एकबार परदा उठाये थे वो!
देख कर जल्वे हम होश खोने लगे!!
चाँद के बदले जब हम ने देखा उन्हें!
ये है वहशी जहाँ सारी कहने लगे!!
क्या बताऊँ रफीकी का हुस्न वो जमाल!
उनकी खुशबू से दावर मचलने लगे!!
छुप के बातिन अहम्मद में थे दावर अली!
आज कुदरत से जाहिर वो होने लगे!!