110. काशाने हजारों हैं

 

 

एक शम्मा सरापा के परवाने हजारों हैं!

एक हुस्न मुजस्सम् के दीवाने हजारों हैं!!

 

उनवान जरूरी है हर एक कहानी का!

इस खाक के पुतले में अफसाने हजारों हैं!!

 

दुनिया के गुलिस्ताँ में गुंचे भी हैं कलियाँ भी!

और हस्तीये आदम में वीराने हजारों हैं!!

 

मंजिल की किसे परवा जब चाहेंगे दम लेंगे!

सहराये तमन्ना में काशाने हजारों हैं!!

 

गेसु को निचोडे तो मैखाने ही बन जाये!

साकी तेरी नज़रों में पैमाने हजारों हैं!!

 

नादरसा कोई तोहफा लेजायेंगे मुर्शद को!

यूँ अपनी निगाहों में दुर्दाने हजारों हैं!!

 

जाहिद के लिए लेकिन बस् एक ही काबा है!

अपने तो लिए दावर बुतखाने हजारों हैं!!

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