कल्मा की कल समझके ही कल्मा पढ़ा करो!
दो कुफ्र चार शिर्क उस से जुदा करो!!
है कितने लफ्ज कल्मे में पहले ये जान लो!
अपनी तरफ से कुछ भी ना उस में रवा करो!!
जो कल्मा है दुरुस्त बहुत कम् हैं जानते!
मुर्शद के पाये नाज पे सजदे अदा करो!!
मुर्शद ही बस् बतायेंगे कल्मे के राज़ को!
जाकर हुजूरे पीर में खिदमत सिवा करो!!
कहते हैं जिस को कल्मा वो आसान तो नहीं!
ला और इला से पहले मुहब्बत ज़रा करो!!
फिर इस के बाद क्या है वो मुर्शद से पूछ लो!
हर दम् सुजूद करके सबक तुम लिया करो!!
मिलता है भेद कल्मे का दावर फकीर से!
तुम उन के आगे हर घडी दिल से झुका करो!!