अर्ज करत है दास तुम्हारा नैया लगा दो पार गुरुजी
मनवा बोलत जीवन करले पर अन करत तकरार गुरुजी
दुख सागर में पाॅंच है नैया पार करो इसे मोरे संवरिया
इसको डुबाए नफ्स ही मोरा जल्द करो उपकार गुरुजी
साधु जोगी रोगी है तोरा द्वार करत है तोरे बीरा
त्याग दिया हूँ दुनिया सारी जानत के मुर्दार गुरुजी
मनवा मोरा भगत है तोरा न जानत है दिन सवेरा
भगवान तो मैं भगत हूँ तोरा कृपा है दरकार गुरुजी
तोरी सूरतवा मनमा बसत के मैं धरत हूँ तोरे चरण पर
गैर को का है गुरु मै बोलूं तुझसे किया हूँ प्यार गुरुजी
और किसी को न जानत हूँ जनम जनम से तोरा भगत हूँ
काबा कलीसा का है जाऊं किन किन में तुम यार गुरुजी
तोरे चलन के साथ चलत हूँ पीरत खातिर आहें भरत हूँ
पावत दावर तुझको मन मा दर्शन था दरकार गुरुजी