95. शहादत होने वाली है

 

 

सुना है आज उनके घर कयामत होने वाली है!

किसी आशिक से फिर उनकी अदावत होने वाली है!!

 

चले हैं सोये मकतल और है तलवार हाथों में!

खुदा जाने वहाँ किस की शहादत होने वाली है!!

 

चलो अये अन्दलीबो आज ओ आयेंगे गुलशन में!

नये अन्दाज से हुस्न व नजाकत होने वाली है!!

 

संवर कर आईने में देखते हैं आप खुद चेहरा!

न जाने आज उन को किस से उलफत होने वाली है!!

 

शिकन उन की जबीं पर है तबस्सुम उन के लब पर है!

गज़ब के बाद फिर सब पर मुरव्वत होने वाली है!!

 

वर्क उलटा रहे हैं दफतरे असियाँ का महशर में!

तुफेल मुस्तफा सब की शफाअत होने वाली है!!

 

मेरा इलहाम अब हद्दे यकीन में आगया दावर!

रसूलल्लाह की मुझ पर इनायत होने वाली है!!

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