गुरूपे जाऊँ निसार निसार मैं तो!
मोरे बलम हैं सौत नगर में!
पूजा करत हूँ अपनी नज़र में!
जान पे उन पर वार निसार मैं तो!
गुरू पे जाओं निसार निसार मैं तो!
रूप कनय्याँ का ओ धारे!
छैल छबिले प्रभु हमारे!
बने कभी गिरधार निसार मैं तो!
गुरूपे जाऔँ निसार निसार मैं तो!
राम लखन हैं मोरे सजनवा!
नैन मिलावत् आके अँगनवा!
उन की ही जै जै कार निसार मैं तो!
गुरूपे जाओं निसार निसार मैं तो!
राधा मैं बन के नाचन लागी!
मुरली की धुन पर मैं बैरागी!
हु हु करे झँकार निसार मैं तो!
गुरूपे जाओं निसार निसार मैं तो!
मोरे रफीक भाग जगादो!
बानसुरी दावर को वो सुनादो!
करलूँ तोहर दीदार निसार मैं तो!
गुरुपे जाओं निसार निसार मैं तो!