बसा हम में आकर खुदा धीरे धीरे!
समझ राजे बातिन जरा धीरे धीरे!!
इशारा दिया हम को कुरआन से वो!
गुमाँ को किया दूर ईमान से वो!
मिला अनफुसकुम् पता धीरे धीरे!
समझ राज बातिन जरा धीरे धीरे!!
वो काबे में नाम अपना जाहिर रखा है!
मगर जिसमे आदम् में आकर छुपा है!
उसे ढूंडले तू जरा धीरे धीरे!
समझ राज बातिन जरा धीरे धीरे!!
नमाज और रोजे में हमको फँसा कर!
वो बैठा है दिल के नगीने में आकर!
अला सूरते खल्क पा धीरे धीरे!
समझ राज बातिन जरा धीरे धीरे!!
ना कर उस से तू लंतरानी की बातें!
ये मूसा का किस्सा कहानी की बातें!
समझ मनतरानी जरा धीरे धीरे!
समझ राज बातिन जारा धीरे धीरे!!
जो शैतान है नपस में वो छुपा है!
पढ़ा उसको कल्मा बडा पारसा है!
बदल उसकी दावर अदा धीरे धीरे!
समझ राजे बातिन् जरा धीरे धीरे!!