122. रब से मिलाए हैं गोहर पिया

 

 

मुझको प्याला पिलाए हैं गोहर पिया

मेरे रब से मिलाए हैं गोहर पिया

 

साथ कोई तुम्हारे न आवे

कीश ओ कारिब भी पीछे तुम्हारे

 

डाल कर क़ब्र में मुँह फिराए

कौन तुमको क़ब्र में तुमको बचाए

 

मेरी क़ब्र में आए हैं गोहर पिया

मेरे रब से मिलाए हैं गोहर पिया

 

ग़फ़लत में हरगिज़ न रहना

होशियारी से दीन कमाना

 

मौत है सर पर भूल न जाना

बाद मरने के न पछताना

 

मुझको हरदम बचाए हैं गोहर पिया

मेरे रब से मिलाए हैं गोहर पिया

 

जो सोया है वह है खोया

जो जागा है वह है पाया

 

जल्दी से अपना हश्र बना ले

दीन का सौदा जल्दी कमा ले

 

मुझको सब कुछ दिलाए हैं गोहर पिया

मेरे रब से मिलाए हैं गोहर पिया

 

कुदरत सारी तन में है तेरे

तेरा ख़ुदा भी मन है तेरे

 

जल्दी से पीर कामिल पकड़ ले

गोहर जैसा पीर पकड़ ले

 

मेरी हस्ती सँवारे हैं गोहर पिया

मेरे रब से मिलाए हैं गोहर पिया

 

पीर बिना तो कैसे बचेगा

ज़ीने बिना तो कैसे चढ़ेगा

 

हथियार नहीं तो कैसे लड़ेगा

उस्ताद नहीं तो कैसे पढ़ेगा

 

मुझे सब कुछ पढ़ाए हैं गोहर पिया

मेरे रब से मिलाए हैं गोहर पिया

 

पहले मुनव्वर कुछ तो निशान था

दीन ओ ईमान पर सिर्फ़ गुमान था

 

जान थी लेकिन मैं बेजान था

ग़फ़लत में मैं खाली मकान था

 

मेरी बक़ा कराए हैं गोहर पिया

मर के जीना सिखाए हैं गोहर पिया

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