पीर जिनको मुरीदां बनाते हैं
उनको खुदरत खुदा की दिखाते हैं
सोई किस्मत वो सबकी जगाते हैं
सबको जलवे खुदा के दिखाते हैं
पीर प्याला कुछ ऐसा पिलाते हैं
मय पने को वो पल में मिटाते हैं
ग़ैरियत से वो सबको हटाते हैं
ऐन रास्ता पे सबको चलाते हैं
वो बचाते हैं सबको बुराई से
करना सबको भलाई सिखाते हैं
दीन-ए-इस्लाम के फ़र्ज़ जितने में
सारे फ़र्ज़ों को साबित कराते हैं
कलमा पोशीदा है सबकी हस्ती में
काड़ कर वो नज़र को बताते हैं
कलमा कलमा को कैसे पढ़ता है
अपनी हिकमत से साबित कराते हैं
सब मुरीदों को हाजी बनाते हैं
अपनी हस्ती में काबा दिखाते हैं
नहनो अकरब कहाँ पर है पोशीदा
एक पल में वो सबको दिखाते हैं
अहद व अहमद है इंसान में पोशीदा
उनको बे पर्दा कर के दिखाते हैं
मेरे दावर की शान है ऐसी
ज़िंदगी में खुदा से मिलाते हैं