102. ज्ञान

 

 

एक पिता और एक है माता सब उनकी संतान
एक ही कुल के दीप हैं सारे दुनिया के इंसान

 

कोई है पंडित कोई है मुल्ला कोई है शंकर कोई अब्दुल्लाह
कोई साधु संत बना है कोई बना मस्तान

 

पूजा व सजदा ढंग है इनका रंग बिरंगी रंग है इनका
एक है पढ़ता वेद के मंत्र एक पढ़ता खुरआन

 

यह पढ़त एका ब्रह्मा वह कहे ला इलाहा
यह कहता रहमान खुदा को वह कहता भगवान

 

माता पिता हैं मनुस्ति रूपा मतलब उसका आदम व हव्वा
उसकी हकीकत को वही जाने जिन को मिला हो ज्ञान

 

हिंदू मुस्लिम भाई भाई बात समझ में जब यह आई
हैरान हो करके हर जाई भाग गया शैतान

 

दावर की कोई जात नहीं है जात की कोई बात नहीं है
यह तो अज़ल से है निर्द्धारी यह है फ़क़त इंसान

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