98. मुरशिद से पूछो

 

 

ये हम से न पूछो अपने मुरशिद से पूछो

मुरशिद से पूछो अपने मुरशिद से पूछो

 

कलमा की कुल तोड़ के मैं कलमा बनाया ला कहने में लाया आरिफ को मनाया

गर अहल ख़िरद तो ये जल्दी से समझलो आरिफ को पकड़लो पूछो मेरा मसला यह क्या है मुअम्मा

 

मैं कौन हूँ क्या हूँ समझते हमें क्या हो तुम कौन हो क्या हो मुझे बतलाओ कहाँ हो और किस से अयाँ हो

मैं कैसा हूँ क्या हूँ तुझे बतलाऊँ कहाँ हो तुम कौन थे क्या थे कैसे थे कहाँ थे

 

जब कुछ भी नहीं था तो कहो कौन था पहले कोई था या अगले उस वक़्त का आलम कहो कैसा था और क्या था

ज़ुल्मात की आँधी थी अंधेरा था अंधेरा हुआ कब यह उजाला क्या कहने से आया कौन सुना था

 

अदम ही था आदम न था नियती में कौन था नाम उसीका अब हुआ पहले कहो क्या नाम था

आदम हो तो बोलो मुझे आदम की हक़ीक़त आदम को बनाया है तो थी कौनसी निस्बत और क्या थी मोहब्बत

 

कहने को तो आसान है यह हू हू की बोली हू हू का जो आलम है हमेशा से है खाली

वह हू भी परेशान था तन्हाई में पहले जब नूर मुहम्मद हुआ ज़ाहिर जो मर्द को अल्लाह समद को

 

कहती है जहाँ सारी अल्लाह ही बड़ा है और उसका जहाँ है सच बोलो कि क्या है कौन सबसे बड़ा है

पहले कहो इमदादे ख़ुदा किसने शुरू की ताअत का यह मसला हुआ आग़ाज़ है किस से हक़ बात में हूँ कि आग़ाज़ नबी से

 

ऐ साक़ी कौसर हो मुनव्वर के मुनव्वर गोहर के भी गोहर दावर के भी दावर और शाफ़ी महशर

उम्मत के पैग़ंबर हम सब के हैं रहबर हो नूर सरापा आका मेरे आका दावर तेरा ख़ादिम यह हक़ीक़त को सुनाया

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