78. पाके छुटकारा

 

 

मुसीबत में जनाब-ए-गौस से फ़रियाद करता हूँ

ग़मों से पाकर छुटकारा मैं दिल को शाद करता हूँ

 

जनाब-ए-गौस की उल्फ़त से बेड़ा पार होता है

सदा उनकी मोहब्बत से मैं दिल आबाद करता हूँ

 

मैं हूँ उनका दीवाना दोस्तों रोज़-ए-अज़ल ही से

मदद उनसे ही लेता हूँ, तलब इमदाद करता हूँ

 

मेरा हर काम बन जाता है उनकी दस्तगीरी से

मैं उनका नाम लेकर काम को इजाद करता हूँ

 

है उनके नाम में तासीर यारो इस्म-ए-आज़म की

मुसीबत भाग जाती है जब उनको याद करता हूँ

 

जनाब-ए-गौस के रुतबे को जाहिद तो न समझेगा

ज़रा तो ग़ौर से सुन ले मैं अब इरशाद करता हूँ

 

मुबारक नाम गौस-ए-पाक लब पर जब मेरे आया

हूँ दावर कामयाबी पाकर दिल को शाद करता हूँ

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