62. सजदे में जा के देख

 

 

अल्लाह के रसूल को अपना बना के देख

आता है क्या मज़ा उन्हें दिल में बसा के देख

 

परवरदिगार को भी मुहम्मद से प्यार है

तू भी रसूले पाक की उल्फ़त में आ के देख

 

आ जाएगा समझ में मुहम्मद का मर्तबा

इश्क-ए-रसूल पाक में हस्ती मिटा के देख

 

इश्क-ए-रसूल पाक बचाता है हश्र में

इश्क-ए-रसूले पाक की दौलत कमा के देख

 

अल्लाह को देखना है मुहम्मद को देख ले

ये दोनों एक नूर हैं सजदे में जा के देख

 

ठुकरा दिया वसीला तो क्या ख़ाक पाएगा

ग़फ़लत को अपने दिल से तू जल्दी भगा के देख

 

सदका रसूल पाक का दावर को मिल गया

दीदार-ए-मुस्तफ़ा है मेरे घर में आ के देख

-+=
Scroll to Top