मेरे आका मेरे अहमद मेरी शमा तुम हो
मेरे ईमान के आँगन का उजाला तुम हो
मुझको दरकार नहीं देर-ओ-हरम जाने की
मेरे मुरशिद मेरा मक्का मेरा काबा तुम हो
आप सा कोई भी हमदर्द ज़माने में नहीं
हम ग़ुलामों का मेरे आका सहारा तुम हो
सारी ख़ल्क़त को बनाया है ख़ुदा फ़ैकुन से
ख़ादरे पाक के सीने का इरादा तुम हो
मेरे सीने में जो तस्वीर छुपी है जिसकी
मेरे आका उसी तस्वीर का चेहरा तुम हो
जो भी आता है मुक़ाबिल वो दिखा देता है
शक नहीं जिसमें कभी पाक वो शीशा तुम हो
आप की मर्ज़ी के साँचे में ढला है दावर
मेरी औक़ात ही क्या मुझको ढलाया तुम हो