49. ख़ुद ख़ुदा ने कहा

 

 

आप नूर-ए-ख़ुदा अफ़ज़ल-ए-मुर्सलीन

आप का वस्फ़ क्या अफ़ज़ल-ए-मुर्सलीन

 

आप हैं किब्रिया आप हैं मुस्तफ़ा

ख़ुद ख़ुदा ने कहा अफ़ज़ल-ए-मुर्सलीन

 

कर के पर्दा मगर हो हयात नबी

ख़ातम-उल-अंबिया अफ़ज़ल-ए-मुर्सलीन

 

आप का कोई सानी जहाँ में नहीं

ना हुआ दूसरा अफ़ज़ल-ए-मुर्सलीन

 

ता अज़ल ता अबद जितने हैं औलिया

तुम पे क़ुर्बान सदा अफ़ज़ल-ए-मुर्सलीन

 

आसियों पर हमेशा करम ही करम

आप मेहर-ओ-वफ़ा अफ़ज़ल-ए-मुर्सलीन

 

रोज़-ए-महशर हो दावर पे इतना करम

या नबी मुस्तफ़ा अफ़ज़ल-ए-मुर्सलीन

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