44. नबी याद आए

 

 

मैं जब चाँद देखा नबी याद आए

दुरूद उन पे भेजा जभी याद आए

 

है नात-ए-मुहम्मद ही मेरा वज़ीफ़ा

मुझे हर हमेशा यही याद आए

 

तसव्वुर में हर पल नबी की है सूरत

मैं आशिक हूँ उनका वही याद आए

 

हर एक साँस मेरी तफ़क्कुर में उनके

निकलती है वो हर घड़ी याद आए

 

अगर दिल परेशान हुआ जब भी मेरा

नबी की कसम है नबी याद आए

 

सिवा उनके कोई वसीला नहीं है

मदद के लिए आप ही याद आए

 

नबी का है दस्त-ए-करम तुम पे दावर

नबी के हो आशिक नबी याद आए

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