40. प्याला मोहम्मद का

 

 

दिल को क़रार और चैन है मेरे हुज़ूर से

रोशन हुआ है दिल ये मोहम्मद के नूर से

 

मैं पी लिया हूँ प्याला मोहम्मद के नाम का

ये आशिक़ी मिली है शराबा तहूर से

 

सरशार दिल है मेरा मोहम्मद के इश्क़ में

क्या वास्ता मुझे कोई हूर ओ ख़ुसूर से

 

ख़ुद को बक़ा बनाने का एक रास्ता है ये

उल्फ़त है मेरे दिल में हमेशा हुज़ूर से

 

आज़िज़ हूँ इन्किसार नबी का हूँ ख़ाकसार

रखता हूँ दिल को अपने बचा कर ग़ुरूर से

 

मूसा को सिर्फ़ प्यार था परवरदिगार से

इस वास्ते वो गिर गए थे कोह-ए-तूर से

 

दावर ने अपने दिल को मुनव्वर बना लिया

ये ज़र्फ़ तुम में पैदा हुआ है हुज़ूर से

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