जो आए हैं इंसान बनकर ज़मीन पर वो नूर-ए-ख़ुदा हैं हमारे मोहम्मद
शफ़ाअत के बाइस यक़ीनन वही हैं वही दिलरुबा हैं हमारे मोहम्मद
बलाएँ मुसीबत टलाते वही हैं हर एक उम्मती को बचाते वही हैं
मरीज़-ए-मुहब्बत उन्हें याद करले वो खुद ही दवा हैं हमारे मोहम्मद
ख़ुदा की क़सम है हमारे मोहम्मद हैं अव्वल से अव्वल और आख़िर से आख़िर
वो पर्दा तो हैं लेकिन दिल की ज़मीन में हयात-ओ-बक़ा हैं हमारे मोहम्मद
नहीं उनका साया पड़ा इस ज़मीन पर तो लाज़िम नहीं है बशर उनको कहना
वो नूर-ए-मुजस्सम ख़ुदाई के मालिक वो सल्ला आला हैं हमारे मोहम्मद
ऐ ज़ाहिद बता दे तुझे क्या हुआ है तू नूर-ए-ख़ुदा को बशर कह रहा है
तू अंधा अज़ल का नहीं उनको देखा वो नूर-ए-हुदा हैं हमारे मोहम्मद
ख़ुदा जिनका आशिक़ ख़ुदा जिनका शैदा वो मुख़्तार-ए-आलम वो नूर-ए-मुजस्सम
उन्हें अपने जैसा समझना गुनाह है ख़ुदा के ख़ुदा हैं हमारे मोहम्मद
बरोज़-ए-क़यामत मोहम्मद के पीछे शफ़ाअत की ख़ातिर सभी होंगे दावर
किया जिन से मौला है बख़्शिश का वादा वही मुस्तफ़ा हैं हमारे मोहम्मद