33. बुलाना या रसूल अल्लाह

 

 

मुझे भी आप का रोज़ा दिखाना या रसूल अल्लाह

सभी आते हैं मुझको भी बुलाना या रसूल अल्लाह

 

तुम्हारे आस्ताने से हर एक का काम बनता है

मेरी सोई हुई क़िस्मत जगाना या रसूल अल्लाह

 

ज़माने के लिए हैं आप आए रहमत-ए-आलम

करम की एक नज़र मुझ पर उठाना या रसूल अल्लाह

 

मेरे आखा मुहम्मद मुस्तफ़ा ईमान है मेरा

मेरे ईमान को यूं ही बचाना या रसूल अल्लाह

 

मेरे आखा अगरचे वस्वसे दिल में हुए पैदा

तो फ़ौरन आप ही उनको मिटाना या रसूल अल्लाह

 

सिवाए आप के मेरा जहां में कौन है आखा

मेरी हालत किसे जा कर सुनाता या रसूल अल्लाह

 

बुला कर आप के दर पर दिखा दो जलवा दावर को

ये ख़ादिम को कभी न भूल जाना या रसूल अल्लाह

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