31. रखना भरम

 

 

आस्तां को तेरे छोड़ कर मैं न जाऊंगा देर-ओ-हरम

मैं अज़ल से हूॅं शैदा तेरा तेरी उल्फ़त है दिल में सनम

 

मुझको औरों की हाजत नहीं और दुनिया से क्या है गरज़

दिल में है तेरी दीवानगी मेरे हमदम ख़ुदा की क़सम

 

मेरे रब से मुझे वास्ता दिल ये कहता है बे-सख़्ता

जान-ए-जान तू है मेरा बलम हो करम हो करम हो करम

 

हुस्न पेश नज़र जब न हो आशिक़ी का मज़ा कुछ नहीं

पाए बोसी का तब है मज़ा यार हो रूबरू कम से कम

 

तेरे क़दमों पे सर रख दिया सारे सजदे अदा हो गए

अब मुकम्मल हुई बंदगी वरना होता हमेशा ये ग़म

 

मेरे हमदम मेरे हमनवा इश्क़ तेरा ही दिल में भरा

लाज रखले मेरे इश्क़ की है यही इल्तिजा दम ब दम

 

वक़्त-ए-सजदा तो हो सामने ये तो दावर की मेराज है

सर झुकाऊं मैं आगे तेरे मेरे सजदों का रखना भरम

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