28. दुआ की बदौलत

 

 

हयाते नबी  में फना हो गया हूँ

मैं उनकी नज़र से बक़ा हो गया हूँ

 

अनलहक का चर्चा करूँ हर गली में

फना फ़ि रसूले ख़ुदा हो गया हूँ

 

हुआ हूँ फना शेख के हर हुक्म पर

मैं हुक्म-ए-ख़ुदा मुरशिदा हो गया हूँ

 

दवाकर गर न करे आशिकों को

मैं आशिक के दिल की दवा हो गया हूँ

 

सियाह कारियों की हश्र में शफ़ाअत

दुआ की बदौलत दुआ हो गया हूँ

 

ख़ुदा और मुहम्मद का दिल जो भाए

मैं उन आशिकों पे फ़िदा हो गया हूँ

 

बरोज़-ए-हश्र आएंगे लोग दावर

ख़ुदा मुस्तफ़ा का गवाह हो गया हूँ

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