मकीन ने रहने को है चश्म-ए-तर पसंद किया
ये कैसी बात है पानी में घर पसंद किया
वो पत्थरों को यक़ीन बोलना सिखाता है
बड़ा कमाल है ऐसा हुनर पसंद किया
हज़ारों सदियों से वो एक जगह नहीं रहता
मुसाफ़िरों की तरह है सफ़र पसंद किया
तेरे कमाल का अंदाज़ा क्या करे कोई
नज़ारे देखने सब की नज़र पसंद किया
तलाश-ए-यार में दर दर की ख़ाक जो छाना
वो हक़ सिफ़ात को क्यों दार पर पसंद किया
हर एक दिल की हक़ीक़त को जानने वाला
निराली बात है शीशे का घर पसंद किया
बड़े कमाल से की इंतिख़ाब दावर ने
हज़ारों लाखों में एक राहबर पसंद किया