Skip to content
लौलाके लमा पर नक्श हुआ गंजे ये इर्फाँ बिस्मिल्ला
वश्शम्स का ईमाँ बिस्मिल्ला वल्लैंलकी है जान बिस्मिल्ला
वो लोह व क़लम भी सदखे है और अर्शे मुखद्दस् है खुर्बाँ
तौसीफ भला मैं कैसे करूं कुरआन का उनवा बिस्मिल्ला
आगाज से पहले बिस्मिल्ला अंजाम से पहले बिस्मिल्ला
मरकज पे टहरती हैं नजरें इस दिल में है पन्हाँ बिस्मिल्ला
बरकत् का यही सामान तो है रहमत भी तसदिक् होती है
ये राज न अबतक समझा कोई क्यों सब से नुमाया बिस्मिल्ला
जब तक न पढोगे बिस्मिल्ला हर काम अधूरा रहता है
खुद हक ने कहा है ऐ दावर कुरआन का कुराऑं बिस्मिल्ला.
-+=