ज़रा तुम सोचकर देखो ख़ुदा का क्या इरादा है
तुम्हें किसी वास्ते अपना ख़लीफ़ा वो बनाया है
ख़ुदा तुम को बनाने पर हमेशा नाज़ करता है
कोई मक़सद रहा होगा तुम्हें नायब बनाया है
फ़रिश्तों से कहा मौला यही है राज़दां मेरा
ये कहकर सब फ़रिश्तों से तुम्हें सज्दा कराया है
ये रुत्बा ख़ालिके बारी तुम्हें बख़्शा है क्यों सोचो
करो तुम ग़ौर कुछ इस पर तुम्हें क्या क्या सिखाया है
ख़ुदा-ए-पाक इंसान को शरफ़ इतना बड़ा बख़्शा
कि इंसान आके ग़फ़लत में ये रुत्बे को भुलाया है
ख़ुदा ने ख़ास मक़सद से किया आग़ाज़ बंदे का
तो लाज़िम हो गया तुम पर कि इस पर चल दिखाना है
फ़रिश्तों ने किया इन्कार था तक़लीद-ए-आदम से
दरे बातिन बताया और सभी क़ुदरत दिखाया है
इरादे को ख़ुदा के जान कर पहचान कर दावर
तुम्हें वाक़िफ़ कराने के लिए तशरीफ़ लाया है