मालिक ने हम तमाम को बख्शा है ज़िंदगी
सच बात तो यही कि तोहफा है ज़िंदगी
यह ज़िंदगी बतौर अमानत है सब के पास
लौटा ना सब को पड़ता है क़र्ज़ा है ज़िंदगी
हम को ख़ुदा नवाज़ा है यह ज़िंदगी इनाम
मकसद ख़ुदा का जान के करना है ज़िंदगी
यह ज़िंदगी किसी को भी क़ायम नहीं मगर
एक दिन तो सब को छोड़ के जाना है ज़िंदगी
आए जहां से लौट के जाना है फिर वहीं
लेकिन यह ज़िंदगी को बचाना है ज़िंदगी
जो ज़िंदगी को मौत के हाथों बचा लिया
ता हश्र ज़िंदा रहता है करता है ज़िंदगी
जो ज़िंदगी पे क़ब्ज़ा जमाया है वो बचा
वरना तो मौत ही का निवाला है ज़िंदगी
मालिक ने अपनी जान को हम में है रख दिया
उस जान आफ़रीं का ख़ज़ाना है ज़िंदगी
दावर ने ज़िंदगी को नई ज़िंदगी दिया
मर्कद का अपने साथी बनाया है ज़िंदगी