4. हर बात में अल्लाह

 

 

आरिफ़ की हर बात में अल्लाह 

है बिस्मिल्लाह ज़ात में अल्लाह 

 

बे से हुई बुनियाद बशर की 

सीन से सिरे सुभ्हान 

मीम में पोशीदा है मुअम्मा 

खुदरत की सौग़ात है अल्लाह 

 

बिस्मिल्लाह की बात निराली 

बिस्मिल्लाह की ज़ात है आली 

बिस्मिल्लाह कुछ रम्ज़ है ऐसा 

अल्लाह हू की ज़ात है अल्लाह 

 

आरिफ़ के हर ज़िक्र में अल्लाह 

आशिक़ की हर फ़िक्र में अल्लाह 

आरिफ़ का बस यह है वज़ीफ़ा 

इसको लगी दिन रात है अल्लाह 

 

है मुनव्वर की बात में अल्लाह 

गंज-ए-गौहर ज़ात में अल्लाह 

मेरे हादी की ज़ात में अल्लाह 

रफ़ीक़-ए-हक़ की सिफ़ात में अल्लाह 

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