खुदा के शेर मुर्तुजा अली अली अली अली!
निगाह व जाने मुस्तफा अली अली अली अली!!
मेरी नज़र हैं मे सुकूँ ये नाम खूब नाम है!
वरक वरक पे है लिखा अली अली अली अली!!
निराली शान वाले हैं जहाँ से वो निराले हैं!
खुदा ने भी तो है कहा अली अली अली अली!!
खुदा की वो सिफात हैं चिराग काईनात हैं!
खिताब खूब ये मिला अली अली अली अली!!
खुदाई निसार है गरीब का करार है!
फिदा हुआ है किब्रीया अली अली अली अली!!
हर एक बात नरम है मगर गजब भी गरम है!
हुआ कभी जो मअरका अली अली अली अली!!
ओ जुल्फकारे हैदरी उन्हीं का हक्क है सर्वरी!
गुलाम दावर आप का अली अली अली अली!!