154. मोलूद गौस पाक

 

 

जहे किस्मत् हम हाजिर हैं यहाँ महबूबे सुबहानी!

शबे मोलूद में आये हुए हैं गौसे जीलानी!!

 

न हो क्यों नूर की बारीश यहाँ है जिक्र आका का!

बडी पुरनूर मजलिस है यहाँ है जिक्र नूरानी!!

 

मेरे गौसुल्वरा का मरतबा सबसे निराला है!

लकब ये खास उन को मिल गया महबूबे सुबहानी!!

 

शिकम् से माँ के जाहिर कर दिये अपनी करामत् को!

वली इब्ने वली हैं गौस मेरे पीर लासानी!!

 

शबे मेअराज हजरत् को दिये कान्धा शहे जीलानी!

सरे अर्शे मुअल्ला पहुँचे मेरे शाह जीलानी!!

 

खुदा के खास बंदों में शुमार होता है आका का!

हकीकत् लेके आये साथ अपने नूरे यज़दानी!!

 

बनाये ग्यारा मुर्शद और उनके पीर कहलायें!

निराली शान वाले हैं हमारे कुतुबे रब्बानी!!

 

नबी के आँखों के तारे अली के माह पारे है!

मेरे गौसुल्वरा हैं फातिमा जहरा के भी जानी!!

 

रहे ता कयामत् औलिया पर आप का साया!

हुआ है और न होगा गौस जैसा कामिल इन्सानी!!

 

मेरे गौसुल्वरा की ये बडी नूरानी मजलिस् है!

अदब के साथ बैठो है यहाँ मौलूदे समदानी!!

 

गुलामी में रखो अपनी यही है इलतिजा आका!

ये दावर अपना दरबानी बुलालो गौसे लासानी!!

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