151. छोड़ दे जाहिद

 

 

ये नफ्स काफर का तरीका छोड़ दे जाहिद!

के ये झूटी शोहरत का मूंह मोड दे जाहिद!!

 

दिखावे की इबादत फवैलुल्ले मुसल्ली है!

तू कुरआन को उठा कर देख ये लोटा फोड दे जाहिद!!

 

इबादत करना हक्क है मगर हो बेरिया लेकिन!

रियाकारी सलातों को ज़रा तू तोडदे जाहिद!!

 

सिरातल् मुस्तकीम कहता है तू हर नमाजों में!

सिरातल्लुजीन ले फिर ये राह छोड़ दे जाहिद!!

 

नमाज़ अब उसी को कहते हैं के दावर रूबरू में हो!

वरक वैसी किताबों का भला तू छोड़ दे जाहिदह!!

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