91. संगे दर माँग लेंगे

 

 

वो लुत्फ वो करम की नजर माँगलेंगे!

दुआ की बजाय असर माँग लेंगे!!

 

रहेगी न दैर वो हरम की तमन्ना!

जबीं के लिए संगे दर माँग लेंगे!!

 

हर एक गाम पर तुझ को सजदे करेंगे!

तुझी से तेरी रहगुजर माँग लेंगे!!

 

बनायेंगे मसकन तेरे आस्तान को!

ना हम तुझ से अजने सफर माँग लेंगे!!

 

उजाला रहेगा वजूदी में हर दम्!

तेरे रुख से शमस वो कमर माँग लेंगे!!

 

ये दुनिया तो कदमों में अपने पड़ी है!

कोई चीज हम मुअतबर माँग लेंगे!!

 

जो है माँग की माँग इस दिलमें दावर!

उसी माँग को माँग कर माँग लेंगे!!

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