85. कहाँ का अजाब है

 

 

दिल आईना है मेरा बडा ला जवाब है!

हर फल्सफा है उस में ये ऐसी किताब है!!

 

तेरे ख़ुदा का सानी तो मैं लाऊँगा आए शेख्!

मेरा खुदा हजारों में एक ला जवाब है!!

 

फिर और मिलना मुझसे नसीहत न कर मुझे!

हाथों में नासेह मेरे जामे शराब है!!

 

रोशन है उसके नूर से दुनिया व दीन भी!

मेरा सनम् खुदा की कसम् माहताब है!!

 

तुम दर बदर की खाक सदा छानते रहो!

अये जहिदो तुह्मरा तो खाना खराब है!!

 

उस के करम पे फिर भी हमें नाज क्यूँ न हो!

इतने किये गुनाह के जो बे हिसाब हैं!!

 

माबूद को समझ के ही हम है सजूद में!

मुर्शद को सजदा करना कहाँ का अजाब है!!

 

पीने की चीज है तो पिये जाते हैं शराब!

दावर हमारे वासते कारे सवाब है!!

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