हीरे की मैं तलाश में गोहर को पालिया!
अन्मोल कामियाब मुकद्दर को पालिया!!
मुद्दत से आरजू थी सदफ् मुझको एक मिले!
छोटी सी आरजू में समन्दर को पालिया!!
जाहिद तेरा उलझना यहाँ ठीक अब नहीं!
इरफाँ की तेग और मैं खंजर को पालिया!!
अब मुझको अपने नफ्स पे काबू है रात दिन!
सब से बड़े वो मौजी सितमगर को पालिया!!
काबा में ढून्ड या उसे काशी में ढून्ड तू!
मैं ने तो उसको दिल के इसी घर में पालिया!!
सादिक अगर हो आँख तो मिलता है वो यहाँ!
बेशक् मैं उस को राजे मुनव्वर में पालिया!!
दावर रफीक आका का ये फैज देखिये!
दावर को मैं ने आशिके दावर में पालिया!!
(सरे मेहशर दिखायेंगे तुम्हें दावर मुनव्वर को!
ये दरबारे मुनव्वर है कदम चूमते जाओ!!)