इशके सादिक है मेरा मुझको मिठा सकता है कौन!
शम्मा वैहदत में जलाहूँ अब जला सकता है कौन!!
मौत कब्बल अंता मौत से है मेरा वास्ता!
जा चुका इन्नी अना तक मुझको लासकता है कौन!!
चश्म दिल में नूर की एक शम्मा देखों जल् उठी!
होगाया रोशन जँहा में अब बुजा सकता है कौन!!
लाइला से मै गुजर कर आया इलल्लाह मे!
पढ लिया कलमा नबी से अब पढ़ा सकता है कौन!!
अनफुसुकुम का मुअम्मा नहन वो अकरब से मिला!
अब किसी मंसूर को सूली चढा सकता है कौन!!
सर कटाकर बोला सरमद्द ला इला अंत अना!
इस के आगे कुच्छ नहीं है राज पासकता है कौन!
हू की तहा तक जा चुका हूँ ये रफीकी है करम!
मैं भी वो गवास हूँ दावर डुबा सकता है कौन!!